
गुह्य मंडल
साधक कक्ष
प्रवेश की मर्यादा एवं साधक संकल्प
यह किसी वेबसाइट का द्वार नहीं, एक तपोभूमि की देहरी है।
यहाँ प्रवेश से पूर्व अपना अहंकार बाहर छोड़ दें।
गोपनीयता का संकल्प
आगम का अटल वचन है — "गोपनीयं गोपनीयं गोपनीयं प्रयत्नतः"। इस कक्ष में प्राप्त कोई भी मंत्र, विधि, यंत्र या रहस्य किसी भी रूप में आगे नहीं जाएगा — न स्क्रीनशॉट से, न रिकॉर्डिंग से, न सोशल मीडिया पर, न किसी समूह में। गोपनीयता ही शक्ति का संचय है; जो ज्ञान प्रदर्शन बन जाए, वह साधना नहीं रहता।
अधिकारी-भेद
यह द्वार उनके लिए नहीं है जो तंत्र से लॉटरी, चमत्कार, वशीकरण, शत्रु-नाश या रातों-रात धन की लालसा रखते हैं। यह कक्ष केवल उन साधकों के लिए है, जो निष्काम कर्मयोग के पथ पर आत्म-शुद्धि, निर्भयता और शिव-तत्त्व की खोज में हैं।
व्यापार और दुरुपयोग का निषेध
यहाँ का ज्ञान गुरु-परंपरा का प्रसाद है, विक्रय की वस्तु नहीं। इसे बेचना, इसके आधार पर अनुष्ठान या "उपाय" बेचना, या स्वयं को सिद्ध घोषित करना वर्जित है। किसी को भयभीत करने, किसी का अहित करने या किसी तामसिक प्रयोग में इसका उपयोग पूर्णतः निषिद्ध है।
गुरु-आज्ञा और अनुशासन
यहाँ का गुह्य ज्ञान समझ के लिए है, स्वतंत्र प्रयोग के लिए नहीं। किसी विशिष्ट या उग्र साधना का अभ्यास केवल दीक्षा और प्रत्यक्ष गुरु-आज्ञा के पश्चात् करें। विधि में अपनी इच्छा से कोई परिवर्तन न करें, और अपने अनुभव विनम्रता से केवल गुरु के समक्ष रखें।
साधक का आचरण
इस कक्ष का सदस्य होना पद नहीं, उत्तरदायित्व है। साधक का आचरण सत्य, संयम और करुणा से युक्त रहेगा। वह परिवार और समाज के दायित्वों से विमुख नहीं होगा, और अपने मूल गुरु तथा सभी परंपराओं का सम्मान करेगा।
सात्त्विक चेतावनी
शास्त्रों का मत है कि जो साधक गुह्य ज्ञान का व्यावसायिक या तामसिक उपयोग करता है, वह स्वयं अपने आध्यात्मिक पतन का कारण बनता है। जो इन मर्यादाओं का उल्लंघन करेगा, वह इस गुरु-शिष्य श्रृंखला से स्वतः अलग हो जाएगा और उसका इस कक्ष में प्रवेश समाप्त कर दिया जाएगा। यह दंड नहीं, सत्य का नियम है।
साधक की गोपनीयता
जिस प्रकार साधक इस ज्ञान को गुप्त रखता है, उसी प्रकार यह कक्ष भी साधक की गोपनीयता की रक्षा करता है। आपका नाम, ईमेल और आपकी जिज्ञासाएँ केवल इस कक्ष के संचालन और आपके मार्गदर्शन हेतु रखी जाती हैं — किसी अन्य को नहीं दी जातीं, और आपके अनुरोध पर हटा दी जाएँगी।
संकल्प
संकल्प सहित प्रवेश-निवेदन भेजेंबटन दबाने पर आपके फ़ोन/कंप्यूटर का ईमेल ऐप खुलेगा, जिसमें निवेदन का प्रारूप पहले से भरा होगा — अपना विवरण भरकर "Send" करें।
यदि कोई ईमेल ऐप न खुले, तो नीचे से Gmail द्वारा भेजें या पता कॉपी कर लें:
diksha@srimalang.comआपका संकल्प स्वीकार हुआ — प्रणाम!
आपका निवेदन-पत्र ईमेल में तैयार है। कृपया अपना विवरण भरकर उसे "Send" अवश्य करें — भेजने के बाद ही निवेदन महाराज जी तक पहुँचता है।
प्रत्येक निवेदन को स्वयं पढ़ा जाता है। अवलोकन के पश्चात् आपको diksha@srimalang.com से उत्तर दिया जाएगा — इसमें कुछ दिन लग सकते हैं, कृपया धैर्य रखें। प्रतीक्षा के इस समय को भी साधना मानें: नित्य गुरु-स्मरण और अपने इष्ट का नाम-जप करते रहें।
॥ श्री गुरवे नमः ॥
साधक कक्ष में प्रवेश निवेदन के अवलोकन के पश्चात् दिया जाता है। निवेदन में ये विवरण अवश्य लिखें: पूरा नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर, जन्म-तिथि, जन्म-स्थान, गोत्र, वैवाहिक स्थिति (अविवाहित/विवाहित), शिक्षा, व्यवसाय (व्यापार/नौकरी), दीक्षा का उद्देश्य और अपनी कठिनाइयों का संक्षिप्त विवरण — ईमेल में यह प्रारूप पहले से भरा मिलेगा। आपकी दी हुई जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है।