साधक के लिए · दैनिक
जप माला
यात्रा में, कार्यालय में या जब माला पास न हो — मोबाइल पर १०८ मनकों की माला
मंत्र चुनें, दिन का संकल्प (कितनी माला) तय करें, और हर जप पर माला के बीच टैप करें। हर १०८ पर एक माला पूरी होती है — घंटी या कंपन से पता चल जाता है, आँखें खोलने की ज़रूरत नहीं। आपका रोज़ का जप-रिकॉर्ड भी बनता चलता है।
कंप्यूटर पर स्पेसबार से भी गिनती होती है। एकाग्र मोड में स्क्रीन पर केवल माला रहती है और स्क्रीन बंद नहीं होती।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादान्महेश्वरि ॥
संकल्प और नियमितता
मेरा जप-रिकॉर्ड
आपका रिकॉर्ड केवल आपके पास: जप की गिनती और रिकॉर्ड केवल आपके अपने फ़ोन या कंप्यूटर के ब्राउज़र में रहते हैं — वेबसाइट पर कहीं नहीं भेजे जाते, कोई और इन्हें नहीं देख सकता। ब्राउज़र का डेटा मिटाने पर या दूसरे फ़ोन पर यह रिकॉर्ड नहीं दिखेगा।
मार्गदर्शन
जप के सरल नियम
- एक समय, एक स्थान, एक आसन: रोज़ एक ही समय (ब्रह्म मुहूर्त या संध्या) पर, एक ही आसन पर बैठकर जप करें। नियमितता से जप स्वयं गहरा होता जाता है।
- संकल्प: आरंभ में मन में तय करें कि आज कितनी माला करेंगे — और उसे पूरा करें। एक माला रोज़ नियम से, कभी-कभी की ग्यारह माला से श्रेष्ठ है।
- गुरु-स्मरण: जप से पहले गुरु और इष्ट का स्मरण करें, अंत में जप उन्हें समर्पित करें।
- तीन प्रकार: वाचिक (बोलकर), उपांशु (होंठ हिलें, ध्वनि न निकले) और मानसिक (केवल मन में)। शास्त्र मानसिक जप को सर्वश्रेष्ठ कहते हैं; आरंभ उपांशु से करना सरल है।
- अर्थ और भाव: संख्या से अधिक महत्व भाव का है। मंत्र के अर्थ और इष्ट के स्वरूप पर ध्यान रखें; मन भटके तो धीरे से लौटा लाएँ — स्वयं को दोष न दें।
- सुमेरु: भौतिक माला में सुमेरु (बड़ा मनका) लाँघा नहीं जाता — माला पूरी होने पर उसे पलटकर उल्टी दिशा में फिर आरंभ करते हैं। इस डिजिटल माला में सुमेरु ऊपर लाल रंग में दिखाया गया है।
विवेक
डिजिटल माला कब, भौतिक माला कब
घर पर नियमित साधना के लिए रुद्राक्ष, स्फटिक, तुलसी या चंदन की माला से जप ही श्रेष्ठ है — माला के मनकों का स्पर्श स्वयं मन को एकाग्र करता है, और साधना से माला भी ऊर्जित होती है। यह डिजिटल माला उस नियम का स्थान नहीं लेती, बल्कि उन क्षणों के लिए है जब माला पास न हो:
- यात्रा में — बस, रेल या विमान में
- कार्यालय के अवकाश में या प्रतीक्षा के समय
- बीमारी या अस्पताल में, जब बैठकर जप संभव न हो
- बच्चों और नए साधकों को जप की आदत डालने के लिए
गुरु-मंत्र की गोपनीयता: दीक्षा में मिला मंत्र गुप्त रखा जाता है — उसे कहीं लिखने की आवश्यकता नहीं। सूची से "गुरु-प्रदत्त मंत्र (गुप्त)" चुनें; स्क्रीन पर मंत्र नहीं दिखेगा, केवल गिनती होगी। सूची में दिए अन्य मंत्र सामान्य उपासना के प्रचलित मंत्र हैं; किसी विशेष साधना या अनुष्ठान के लिए मंत्र, संख्या और विधि अपने गुरु से ही लें।
समर्पण
जप-समर्पण
जप पूरा होने पर हाथ में जल लेकर, या केवल मन में, जप इष्ट-देवता को समर्पित किया जाता है। देवी-उपासना में:
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम् ।
सिद्धिर्भवतु मे देवि त्वत्प्रसादान्महेश्वरि ॥— जप-समर्पण का प्रचलित श्लोक
भावार्थ: हे माँ, आप गुप्त से भी गुप्त की रक्षा करने वाली हैं — मेरे किए इस जप को स्वीकार करें। हे महेश्वरी, आपकी कृपा से मुझे सिद्धि (साधना में सफलता) प्राप्त हो।
शिव-उपासना में "गुह्यातिगुह्यगोप्ता त्वं … त्वत्प्रसादान्महेश्वर" और विष्णु-उपासना में "अनेन जपेन श्री भगवान् विष्णुः प्रीयताम्" कहकर जप समर्पित किया जाता है। समर्पण के बाद जप का फल अपने पास नहीं रखा जाता — यही निष्काम साधना का भाव है।
